
लखनऊ | लोक निर्माण टाइम्स विशेष संवाददाता
राजघराना स्मार्ट सिटी वेल्फेयर रेजीडेंशियल सोसाइटी, सेवई, लखनऊ में शुक्रवार को लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) की कार्रवाई के विरोध में स्थानीय निवासियों ने भारी विरोध और धरना प्रदर्शन किया। सोसाइटी का आरोप है कि बिना किसी विधिक नोटिस और सुनवाई के अधिकार के एलडीए अधिकारियों ने आम जनता द्वारा किए जा रहे विकास कार्यों को बलपूर्वक तोड़ दिया।
🔨 अधिकारी आए थे अवैध कॉलोनी पर कार्रवाई करने, लेकिन तोड़ डाली वैध कॉलोनी की संपत्ति
प्राप्त जानकारी के अनुसार, एलडीए के जोन 2 के जोनल अधिकारी प्रभाकर सिंह, अवर अभियंता विभोर श्रीवास्तव और भारी पुलिस बल के साथ क्षेत्र में पहुंचे थे। यह दल जितेंद्र यादव, शैलेंद्र और विजय चौधरी द्वारा की जा रही अवैध प्लॉटिंग पर कार्रवाई के लिए आया था, लेकिन इन प्रभावशाली लोगों के प्रभाव में आकर राजघराना स्मार्ट सिटी जैसी वैध और रजिस्टर्ड सोसाइटी को निशाना बनाया गया।
अधिकारियों ने देवेंद्र मिश्रा और अंबिका प्रसाद मिश्रा के बने हुए मकान, साथ ही कॉलोनी के अन्य लोगों की बाउंड्री वॉल, नालियों और सड़क निर्माण को बिना जांच और दस्तावेजों के ध्वस्त कर दिया।
🧾 प्रशासनिक पक्षपात और साज़िश का आरोप
स्थानीय नागरिकों ने आरोप लगाया कि शैलेश, जितेंद्र यादव और विजय चौधरी ने सोची-समझी साजिश के तहत अधिकारियों को गुमराह कर के अपनी अवैध कॉलोनी को बचाते हुए वैध कॉलोनी पर कार्रवाई करवा दी। जब स्थानीय नागरिकों ने विरोध किया तो अधिकारी मुकर गए और जिम्मेदारी से बचने लगे।
📢 जनता की प्रमुख माँगें:
- एलडीए अधिकारियों की भूमिका की उच्च स्तरीय न्यायिक जांच हो।
- देवेंद्र मिश्रा, अंबिका मिश्रा और अन्य नागरिकों को हुए नुकसान की भरपाई की जाए।
- विकास कार्यों में बाधा डालने वाले दोषी व्यक्तियों (शैलेश, विजय, जितेंद्र) के खिलाफ कानूनी कार्यवाही हो।
- राजघराना स्मार्ट सिटी को अवैध बताने वाले अधिकारियों से स्पष्टीकरण लिया जाए।
🗣️ सोसाइटी का स्पष्ट संदेश:
सोसाइटी के सचिव शंकर दयाल गुप्ता और दुर्गेश श्रीवास्त्व ने कहा कि “हमारे द्वारा रजिस्टर्ड, स्वविकसित कॉलोनी को जानबूझकर नुकसान पहुंचाना सोची-समझी चाल है। यदि इस अन्याय का समाधान शीघ्र नहीं हुआ, तो हम सामूहिक रूप से जिला कार्यालय और न्यायालय में संघर्ष तेज करेंगे।”




