
लखनऊ | विशेष संवाददाता, लोक निर्माण टाइम्स
सेवाई, लखनऊ स्थित राजघराना स्मार्ट सिटी वेल्फेयर रेजीडेन्सियल सोसाइटी के वैध कॉलोनी विकास को लेकर भारी विवाद उत्पन्न हो गया है। सोसाइटी पदाधिकारियों और स्थानीय नागरिकों ने आरोप लगाया है कि कुछ भूमाफिया और अवैध प्लॉटिंग करने वाले लोग ‘राजघराना’ नाम का दुरुपयोग कर रहे हैं, जिससे वास्तविक और वैध सोसाइटी की छवि धूमिल हो रही है।
⚠️ इन लोगों ने ‘राजघराना’ नाम का किया दुरुपयोग:
प्राप्त जानकारी के अनुसार, विजय चौधरी, जितेंद्र यादव, शैलेश यादव, 99 घर और संतोष सिंह द्वारा राजघराना स्मार्ट सिटी के नाम पर अवैध प्लॉटिंग की गई, जबकि इनका वैध राजघराना स्मार्ट सिटी से कोई लेना- देना नही है।
🏘️ राजघराना स्मार्ट सिटी – 2015 से ही विकसित कॉलोनी
राजघराना स्मार्ट सिटी कॉलोनी वर्ष 2015 से पहले ही विकसित हो चुकी थी और इसे स्थानीय निवासियों के सहमति से राजघराना स्मार्ट सिटी वेल्फेयर रेजीडेन्सियल सोसाइटी को विधिवत रूप से सौंपा गया था। यह कॉलोनी वर्षों से भूतपूर्व सैनिकों, वरिष्ठ नागरिकों और सम्मानित परिवारों का निवास स्थान रही है।
🚨 एलडीए कार्रवाई में वैध कॉलोनी को निशाना बनाया गया
वर्तमान में हुई एलडीए की कार्रवाई में, वास्तविक और वैध रूप से बसी कॉलोनी के प्लॉट मालिकों, जिनमें भूतपूर्व सैनिक और वर्षों पहले जमीन खरीद चुके सम्मानित नागरिक शामिल हैं, उनकी संपत्तियों को तोड़ा गया। इससे आम जनता और सोसाइटी में जबरदस्त आक्रोश फैल गया है।
📢 सोसाइटी पदाधिकारियों की मांग:
- ‘राजघराना’ नाम का दुरुपयोग करने वालों के विरुद्ध FIR दर्ज की जाए।
- एलडीए को स्पष्ट करना होगा कि उनकी कार्रवाई किन दस्तावेजों के आधार पर हुई।
- भूतपूर्व सैनिकों और वैध प्लॉट धारकों की संपत्ति की क्षति की भरपाई की जाए।
- वास्तविक और पंजीकृत सोसाइटी – राजघराना स्मार्ट सिटी वेल्फेयर रेजीडेन्सियल सोसाइटी – की छवि की रक्षा की जाए।
🗣️ अध्यक्ष अशोक कुमार गुप्ता का बयान:
“कुछ भू-माफियाओं ने हमारे नाम का दुरुपयोग कर अवैध प्लॉटिंग की है, और जब कार्रवाई हुई, तो दोष हमारे सिर मढ़ दिया गया। यह पूरी तरह अन्याय है। हम इसकी शिकायत शासन, प्रशासन और न्यायालय तक ले जाएगी




