ऑपरेशन सिंदूर में देश की रक्षा कर रहे जवानों की बाउंड्री तोड़ी, भू-माफियाओं को बचाया गया — राजघराना स्मार्ट सिटी में एलडीए की पक्षपाती कार्रवाई पर भड़की जनता

लखनऊ | विशेष संवाददाता, लोक निर्माण टाइम्स

देश की रक्षा में ऑपरेशन सिंदूर जैसे सैन्य अभियानों में तैनात फौजी जब सीमा पर जान की बाज़ी लगाकर राष्ट्र की सुरक्षा कर रहे हैं, तब लखनऊ में उनकी पीठ पीछे उनके आशियानों को ढहा दिया गया।
लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) की बिना नोटिस और बिना सुनवाई की गई कार्रवाई में राजघराना स्मार्ट सिटी वेल्फेयर रेजीडेन्सियल सोसाइटी में रह रहे भूतपूर्व सैनिकों और सैन्य सेवा में लगे परिवारों के वैध प्लॉट्स और बाउंड्री वॉल को बुलडोज़र से गिरा दिया गया।

⚠️ दोषी भू-माफिया सुरक्षित, सैनिकों पर गिरी कार्रवाई

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यह कार्रवाई उस “राजघराना स्मार्ट सिटी” पर की गई, जिसे वर्ष 2006 में वैध रूप से बसाया गया था और आज भी उसके रजिस्टर्ड दस्तावेज मौजूद हैं।
वास्तव में, विजय चौधरी, जितेंद्र यादव, शैलेश यादव, संतोष सिंह और ’99 घर’ समूह ने इस नाम का दुरुपयोग कर बिजली, सीवरेज और रोड जैसी बुनियादी सुविधाएं देने का झांसा देकर सैकड़ों प्लॉट बेच दिए, लेकिन आज तक एक खंभा तक नहीं लगाया।

जब एलडीए ने क्षेत्र में कार्रवाई की योजना बनाई, तो इन प्रभावशाली भू-माफियाओं को छोड़कर उसी वैध कॉलोनी को निशाना बनाया गया, जहाँ के प्लॉट धारकों में देश की सेवा में तैनात जवान और रिटायर्ड सैनिक थे।

💣 ऑपरेशन सिंदूर के नाम से जुड़े सैनिकों की बाउंड्री टूटी

गौरतलब है कि ऑपरेशन सिंदूर के तहत देश की सीमाओं और संवेदनशील क्षेत्रों में तैनात जवान, जो हर रोज़ गोलियों और बारूदी सुरंगों के साए में रहकर देश की सुरक्षा में लगे हैं — उन्हीं का लखनऊ स्थित एकमात्र सहारा – उनका घर – एलडीए द्वारा तोड़ दिया गया।

यह घटना सिर्फ प्रशासनिक विफलता नहीं बल्कि राष्ट्र सेवा के लिए समर्पित सैनिकों का अपमान है।

🔥 जनता में भारी आक्रोश

राजघराना स्मार्ट सिटी वेल्फेयर रेजीडेन्सियल सोसाइटी के लोगों ने धरना प्रदर्शन किया और एलडीए अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए कि वे भू-माफियाओं के इशारे पर वैध कॉलोनी को बदनाम कर रहे हैं।

सोसाइटी के अध्यक्ष रवि गुप्त और सचिव शंकर दयाल गुप्ता ने बताया:
“जो लोग देश के लिए अपने प्राणों की बाजी लगा रहे हैं, उन्हीं का घर सुरक्षित नहीं — यह शर्मनाक है। एलडीए को अगर कार्रवाई करनी थी तो उन भू-माफियाओं पर करता, जिन्होंने न बिजली दी, न सीवर, न सड़क – सिर्फ धोखा दिया।”

📢 नागरिकों की मांग:

  1. ऑपरेशन सिंदूर में तैनात फौजियों की संपत्ति की क्षति की भरपाई हो।
  2. राजघराना नाम का दुरुपयोग करने वाले भूमाफियाओं पर कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए।
  3. एलडीए की पक्षपातपूर्ण कार्रवाई की उच्च स्तरीय जांच हो।
  4. भविष्य में किसी वैध कॉलोनी पर बिना नोटिस कार्यवाही न की जाए।

यह रिपोर्ट राष्ट्रहित, सैनिक सम्मान और जनता के अधिकारों के लिए एक आवाज़ है। क्या अब भी हम चुप रहेंगे?

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