कसबा व महिला थानाध्यक्ष समेत चार पर कसा शिकंजा, डीआइजी ने किया निलंबित

Bihar News: दुष्कर्म की शिकार एक दलित पीड़िता इंसाफ के लिए दर-दर भटकती रही थी लेकिन पुलिस वालों ने उसकी नहीं सुनी. जांच के बाद इस मामले में पूर्णिया प्रक्षेत्र के डीआइजी प्रमोद कुमार मंडल कसबा व महिला थानाध्यक्ष समेत चार को निलंबित कर दिया है. यह मामला उनके थाना इलाके का नहीं है. परिणाम यह हुआ कि महिला एक थाने से दूसरे थाने का चक्कर लगाती रही. यह मामला जब पूर्णिया प्रक्षेत्र के डीआइजी प्रमोद कुमार मंडल के संज्ञान में आया तब उन्होंने इसकी जांच के आदेश दिए. जांच के बाद यह मामला सही पाया गया. इस मामले में डीआइजी ने कसबा थानाध्यक्ष अजय कुमार अजनबी, महिला थानाध्यक्ष सुधा कुमारी, महिला थाना के पुलिस पदाधिकारी पुअनि बबन कुमार सिन्हा तथा सअनि रीना कुमारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है.

यह है पूरा मामला

मिली जानकारी के अनुसार कसवा थाना के जवरपुर बड़ियाल की एक महिला की शिकायत थी कि उसकी 15 वर्षीया बेटी 03 जुलाई को सदर थाना इलाके के खैरूगंज अपने मौसेरी सास के यहां गयी थी. पांच जुलाई की रात करीब 01:00 बजे जब इनकी पुत्री शौच के लिए घर से निकली को उसी समय थाना सदर इलाके के साकिन खैरूगंज निवासी सुरेन उरांव (42) इनकी बेटी को पकड़ कर बांसबाड़ी ले गया. यहां उनकी बेटी के साथ जबरदस्ती की. इसके बाद सुरेन उरांव इनकी बेटी के गले में रस्सी लपेटकर जान मारने की कोशिश की. इनकी बेटी के बेहोश हो जाने पर वह उसे मृत समझ कर वहां से भाग गया. कुछ देर बाद होश आने पर वह किसी तरह वहां से भागी.

शिकायत लेकर पहुंची पीड़िता की मां

इस मामले को लेकर पीड़िता की मां 5 जुलाई 2025 को महिला थाने में प्राथमिकी दर्ज कराने आई लेकिन महिला पुलिस ने यह कहकर टाल दिया यह यह मामला कसबा थाना का है. पीड़िता की मां जब कसबा थाना पहुंची तो वहां भी पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज नहीं किया. यहां बोला गया कि घटनास्थल सदर थाना अन्तर्गत पड़ता है. अंततः सदर थाना में यह मामला 6 जुलाई को दर्ज किया गया. मामला डीआइजी के संज्ञान में आने पर इसकी जांच करायी गई. जांच में कसबा और महिला थाना पुलिस की लापरवाही सामने आयी.

पूर्णिया के डीआइजी ने लिया संज्ञान

इस मामले में पूर्णिया के डीआइजी प्रमोद कुमार मंडल ने कहा कांड की वादिनी और पीड़िता को अनावश्यक परेशानी का सामना करना पड़ा और उनके हितों को आधात पहुंचा. ऐसे मामलों से आमजनों में पुलिस के प्रति विश्वास में कमी आती है. इस तक के मामले को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. बिहार पुलिस मुख्यालय की ओर से हाल ही में शून्य प्राथमिकी के संबंध में एक मानक संचालन प्रक्रिया का भी निर्गमन किया गया है. इसी सभी थानाध्यधों के बीच परिचालित कर दिया गया था लेकिन आदेश का उल्लंघन करते हुए इसकी अनदेखी की गई.

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