लखनऊ।मोहनलालगंज क्षेत्र सरथुआ गाँव मे तालाब और नाले को लेकर फैलाई जा रही खबरों को लेकर स्थिति अब स्पष्ट होती दिख रही है। मौके की जांच और स्थानीय जानकारी के अनुसार कंपनी द्वारा बेचे गए किसी भी प्लॉट का अस्तित्व न तो नाले में पाया गया है और न ही तालाब की भूमि पर।
कंपनी पक्ष का कहना है कि उनके द्वारा केवल वैध भूमि पर ही प्लॉट बिक्री की गई है। नाला अथवा तालाब की सरकारी भूमि में किसी भी प्रकार की प्लॉटिंग या कब्जा मौके पर प्रमाणित नहीं हुआ।
स्थानीय निवासियों और सोसाइटी पदाधिकारियों के अनुसार नाले का विकास राजघराना वेल्फेयर सोसाइटी द्वारा निवासियों के सहयोग से कराया गया, ताकि जल निकासी बेहतर हो सके और क्षेत्र में जलभराव की समस्या न रहे। यह कार्य किसी अतिक्रमण के उद्देश्य से नहीं, बल्कि जनहित में किया गया।
वहीं तालाब को लेकर स्पष्ट किया गया कि तालाब का जिर्नोद्धार (Renovation) कराया गया है, जिससे उसका मूल स्वरूप सुरक्षित रहे और जल संरक्षण को बढ़ावा मिले। तालाब को पाटने या समाप्त करने जैसी कोई कार्रवाई नहीं की गई।
स्थानीय लोगों का कहना है कि अधूरी जानकारी और सोशल मीडिया संदेशों के कारण भ्रम की स्थिति बनाई गई, जबकि जमीनी हकीकत इससे अलग है।
नाला–तालाब में कोई प्लॉट नहीं, विकास कार्य नियमों के तहत — भ्रामक खबरों से फैला भ्रम
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