काश्तकार की भूमि को बंजर घोषित करने की कोशिश, प्रकरण पहुंचा जिलाधिकारी तक

लखनऊ, लोक निर्माण टाईम्स।
राजधानी लखनऊ के सरोजनीनगर तहसील अंतर्गत ग्राम सेवई और मोहनलालगंज तहसील के ग्राम सरथूआ में भूमि सीमांकन विवाद गहराता जा रहा है। राजघराना स्मार्ट सिटी के निवासी अशोक कुमार गुप्ता, जो सेवई ग्राम में स्थित गाटा संख्या 755, 753, 754, 764, 762, 760, 778, 782 सहित अन्य भूमि के काश्तकार हैं, ने जिलाधिकारी लखनऊ सहित उपजिलाधिकारी सरोजनीनगर व मोहनलालगंज को शिकायत पत्र सौंपा है।

क्या है मामला?
प्राप्त जानकारी के अनुसार सेवई ग्राम की लगभग 2 बीघा भूमि सीमांकन की गड़बड़ी के कारण सरथूआ ग्राम में दर्शाई जा रही है। साथ ही, गाटा संख्या 763, 761, 742 का क्षेत्रफल गलत तरीके से अधिक दर्शाकर असली मालिक की भूमि को गायब या कम दिखाया जा रहा है। यह स्थिति भूमि अभिलेख (खतौनी व नक्शा) में असंगतियों के कारण उत्पन्न हुई है।

धारा 30/32 के अंतर्गत वाद लंबित
श्री अशोक कुमार गुप्ता ने उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 की धारा 30 (अभिलेख संशोधन) और धारा 32 (सीमांकन) के अंतर्गत वाद प्रस्तुत कर रखा है जो न्यायालय में विचाराधीन है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया है कि उनकी भूमि धारा 80 के अंतर्गत आवासीय प्रयोजन हेतु मान्य है।

उच्च न्यायालय के आदेश का उल्लंघन!
प्रार्थी का कहना है कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय के निर्देशानुसार, जब तक काश्तकार की भूमि का सीमांकन न हो जाए, तब तक शेष भूमि को न तो बंजर घोषित किया जा सकता है और न ही सरकारी। लेकिन स्थानीय स्तर पर बिना काश्तकार की भूमि की पुष्टि के ही अन्य भूमि को बंजर घोषित करने की प्रक्रिया चलाई जा रही है, जो पूर्णतः अवैध है।

मांग क्या है?
अशोक कुमार गुप्ता ने जिलाधिकारी लखनऊ से मांग की है कि पहले उनकी व्यक्तिगत भूमि का सीमांकन निष्पक्ष रूप से किया जाए, जिसमें दोनों ग्रामों के लेखपाल, कानूनगो व राजस्व निरीक्षक की उपस्थिति हो। साथ ही जब तक उनकी भूमि की पुष्टि नहीं हो जाती, तब तक किसी भी भूमि को बंजर या सरकारी घोषित करने की कार्यवाही पर रोक लगाई जाए।

राजस्व विभाग की भूमिका पर सवाल
इस मामले में राजस्व विभाग की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं कि जब अभिलेखीय विवाद लंबित है, तब किसी प्रकार की बंजर/सरकारी भूमि की कार्यवाही कैसे की जा सकती है?

समाप्ति
यह मामला न सिर्फ एक काश्तकार की भूमि के अस्तित्व की लड़ाई है, बल्कि यह उदाहरण बन सकता है कि किस प्रकार भूमि रिकॉर्ड की पारदर्शिता और सीमांकन की प्रक्रिया को सुधारा जाना चाहिए।

 

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