पतंजलि को हाई कोर्ट से तगड़ा झटका, 273.5 करोड़ के GST जुर्माने पर राहत नहीं

Patanjali GST Penalty: इलाहाबाद हाई कोर्ट से पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड को बड़ा झटका लगा है. कोर्ट ने पंतजलि की 273.5 करोड़ रुपये के जीएसटी जुर्माने को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया है. कोर्ट ने यह फैसला दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद 29 मई को दिया था.

हाई कोर्ट ने आदेश में कही ये बातें

न्यायमूर्ति शेखर बी. सराफ और न्यायमूर्ति विपिन चंद्र दीक्षित की खंडपीठ ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि जीएसटी अधिनियम की धारा 122 के तहत कर अधिकारियों को दीवानी प्रक्रिया के तहत जुर्माना लगाने का अधिकार है और इसके लिए आपराधिक मुकदमे की आवश्यकता नहीं है. कोर्ट ने यह भी कहा कि यह कार्यवाही न्याय निर्णय अधिकारी द्वारा की जाती है, जो दीवानी प्रकृति की होती है.

पतंजलि के दावे को खारिज

पतंजलि ने अपनी याचिका में यह तर्क दिया था कि इस तरह का जुर्माना आपराधिक प्रकृति का है और इसे तभी लगाया जा सकता है जब कंपनी के खिलाफ आपराधिक मुकदमा चले और दोष सिद्ध हो. लेकिन हाई कोर्ट ने पतंजलि के इस तर्क को खारिज कर दिया.

पतंजलि आयुर्वेद की ये यूनिट्स जांच के दायरे में आईं

गौरतलब है कि पतंजलि आयुर्वेद की तीन इकाइयां हरिद्वार (उत्तराखंड), सोनीपत (हरियाणा) और अहमदनगर (महाराष्ट्र) जांच के दायरे में आई थीं. अधिकारियों को शक था कि कंपनी ने कागजी चालानों के जरिए वास्तविक आपूर्ति के बिना इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) का अनुचित लाभ उठाया.

2024 जारी हुआ था कारण बताओ नोटिस

जांच के आधार पर जीएसटी आसूचना महानिदेशालय (DGGI), गाजियाबाद ने 19 अप्रैल 2024 को पतंजलि को कारण बताओ नोटिस जारी किया था. नोटिस में कंपनी पर 273.51 करोड़ रुपये का जुर्माना प्रस्तावित किया गया था. इस पर पतंजलि ने उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल की थी. अब हाई कोर्ट के फैसले के बाद पतंजलि को जुर्माने की प्रक्रिया का सामना करना पड़ेगा.

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