परहित अर्पित अपना तन-मन…’ अटल जी की कविता सुनाते हुए पीएम मोदी का भावुक संबोधन, क्या-क्या कहा?


लखनऊ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को लखनऊ में भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की 101वीं जयंती के अवसर पर लगभग 230 करोड़ रुपये की लागत से विकसित राष्ट्र प्रेरणा स्थल का लोकार्पण किया। इस मौके पर आयोजित विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने अटल जी की प्रसिद्ध कविता “परहित अर्पित अपना तन-मन…” का पाठ किया और कहा कि अटल जी का जीवन सेवा, समर्पण और राष्ट्रहित का जीवंत उदाहरण है।
अटल जी की कविता से शुरुआत, भावुक हुआ जनसमूह
पीएम मोदी ने मंच से अटल बिहारी वाजपेयी की पंक्तियाँ पढ़ते हुए कहा कि यह कविता त्याग और कर्तव्य की पराकाष्ठा को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि अटल जी ने राजनीति को सत्ता का साधन नहीं, राष्ट्रसेवा का माध्यम बनाया।
‘राष्ट्र प्रेरणा स्थल आने वाली पीढ़ियों का मार्गदर्शक बनेगा’
प्रधानमंत्री ने कहा कि राष्ट्र प्रेरणा स्थल आजादी के बाद के महान विचारकों और राष्ट्रनायकों की विरासत को सहेजने का प्रयास है।
“यह स्थल केवल स्मारक नहीं, बल्कि विचारों का तीर्थ है, जहाँ से युवा पीढ़ी को राष्ट्रनिर्माण की प्रेरणा मिलेगी।”
अटल जी का सुशासन और लोकतांत्रिक मूल्य
पीएम मोदी ने कहा कि अटल जी ने कठिन परिस्थितियों में भी लोकतंत्र, संवाद और सहमति को सर्वोपरि रखा।
परमाणु परीक्षण के बाद वैश्विक दबाव
सीमाओं की सुरक्षा
सड़क, संचार और बुनियादी ढांचे पर जोर
इन सभी क्षेत्रों में अटल जी का नेतृत्व दूरदर्शी और निर्णायक रहा।
‘विकास और विरासत—दोनों साथ’
प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार विकास के साथ-साथ विरासत को भी सम्मान दे रही है।
“देश तब आगे बढ़ता है जब वह अपने महान व्यक्तित्वों से प्रेरणा लेकर भविष्य की दिशा तय करता है।”
युवाओं को संदेश
पीएम मोदी ने युवाओं से आह्वान किया कि वे अटल जी के आदर्श—राष्ट्र प्रथम, संवाद, संयम और सेवा—को अपने जीवन में उतारें। उन्होंने कहा कि भारत आज आत्मनिर्भरता, तकनीक और नवाचार के रास्ते पर तेज़ी से बढ़ रहा है और इसमें युवाओं की भूमिका निर्णायक है।
कार्यक्रम की प्रमुख झलकियाँ
राष्ट्र प्रेरणा स्थल का लोकार्पण
अटल बिहारी वाजपेयी सहित महान विचारकों को श्रद्धांजलि
विशाल जनसभा को संबोधन
सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ और स्मृति प्रदर्शनी

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