
इस्लामाबाद/नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर के पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत के कड़े रुख और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आतंकवाद के खिलाफ उठाई गई आवाज़ से पाकिस्तान की सरकार और सेना में गहरी बेचैनी दिखाई दे रही है। हालात इतने तनावपूर्ण हो गए कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ को रविवार को अचानक ISI मुख्यालय की आपातकालीन यात्रा करनी पड़ी, जहां उन्होंने आर्मी चीफ, रक्षा मंत्री, डिप्टी प्रधानमंत्री और खुफिया एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक की।
भारत से खतरे को लेकर ISI में मंथन
ISI मुख्यालय से जारी तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि पाकिस्तान का शासन और सैन्य ढांचा भारत की संभावित कार्रवाई को लेकर चिंतित है। प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी बयान में स्वीकार किया गया है कि भारत की ‘आक्रामक रणनीति’ को देखते हुए पाकिस्तान को अपनी सैन्य तैयारियों की समीक्षा करनी पड़ी है।
पहलगाम हमले के बाद अंतरराष्ट्रीय मंचों पर दबाव
पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने कूटनीतिक मोर्चे पर भी पाकिस्तान को घेरा। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की गुप्त बैठक में पाकिस्तान को कठघरे में खड़ा किया गया। सूत्रों के अनुसार, कई सदस्य देशों ने हमले के तार लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े होने की आशंका जताई जो पाकिस्तान में पनाह लिए हुए है।
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने भी कहा कि यूएन में पाकिस्तान की “झूठी कहानी” का पर्दाफाश हो गया है और कोई भी देश उसके ‘फॉल्स फ्लैग ऑपरेशन’ के नैरेटिव को स्वीकार नहीं कर रहा।
अलग-थलग पड़ा पाकिस्तान
यूएन महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने दोनों देशों से संयम बरतने की अपील की, लेकिन उन्होंने पहलगाम हमले की कड़ी निंदा की। पाकिस्तान के स्थायी प्रतिनिधि असीम इफ्तिखार को प्रेस के सामने सफाई देनी पड़ी कि “हम भारत के साथ बातचीत को तैयार हैं” – यह बयान खुद ही उनके अंदरूनी भय को बयां करता है।
निष्कर्ष:
भारत की सैन्य और कूटनीतिक दृढ़ता से पाकिस्तान की सत्ता और सुरक्षा व्यवस्था सहनशीलता की परीक्षा से गुजर रही है। ISI मुख्यालय में हुई यह आपात बैठक न केवल रणनीति का हिस्सा थी, बल्कि यह उस गहरे भय और भ्रम की भी झलक है, जिसमें इस्लामाबाद की सत्ता डूबी हुई दिखाई देती है।




