
इस्लामाबाद / नई दिल्ली | 7 मई 2025
भारत द्वारा आतंकियों के खिलाफ शुरू किए गए ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाक अधिकृत कश्मीर (PoK) में 9 आतंकी ठिकानों पर किए गए एयर स्ट्राइक के बाद पाकिस्तान की सरकार और सेना में गहरी बेचैनी देखी जा रही है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने इस हमले को “एक्ट ऑफ वॉर” करार देते हुए भारत को “मुंहतोड़ जवाब” देने की धमकी दी है।
शहबाज़ शरीफ़ की प्रतिक्रिया:
प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व Twitter) पर लिखा:
“दुश्मन ने पाकिस्तान की पाँच जगहों पर कायराना हमले किए हैं। यह भारत की ओर से युद्ध की घोषणा है। पाकिस्तान को इसका जवाब देने का पूरा हक है और जवाब दिया जा रहा है।”
उन्होंने आगे कहा:
“पाकिस्तान की पूरी आवाम अपनी सेना के साथ खड़ी है और हम दुश्मनों को उनके नापाक इरादों में कभी सफल नहीं होने देंगे।”
रक्षा मंत्री का आरोप: सिविल ठिकानों को बनाया निशाना

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख़्वाजा आसिफ़ ने बीबीसी उर्दू से बात करते हुए दावा किया कि भारत ने आतंकी ठिकानों को नहीं, बल्कि “सिविल आबादी” को निशाना बनाया। उन्होंने कहा:
“हमारी दो मस्जिदें क्षतिग्रस्त हुई हैं, एक बच्चा और एक महिला की मौत हुई है। ये सभी सात टारगेट – जिनमें से दो कश्मीर में और पाँच पाकिस्तान के भीतर हैं – आम नागरिक इलाकों में थे।”
उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मीडिया से अपील की कि वे इन जगहों का दौरा कर खुद स्थिति की जांच करें।
पंजाब प्रांत में आपातकाल घोषित
हमले के बाद पाकिस्तान के पंजाब प्रांत की मुख्यमंत्री मरियम नवाज़ शरीफ़ ने पूरे प्रांत में आपात स्थिति लागू कर दी है। सभी शासकीय विभागों और नागरिक सुरक्षा संस्थाओं को अलर्ट कर दिया गया है। मरियम नवाज़ ने एक्स पर आदेश की कॉपी साझा करते हुए लिखा कि बुधवार को पंजाब के सभी शैक्षणिक संस्थान बंद रहेंगे।
भारत की ओर से स्थिति स्पष्ट
भारतीय रक्षा मंत्रालय के अनुसार, ऑपरेशन सिंदूर में केवल उन्हीं ठिकानों को निशाना बनाया गया जहां से भारत में आतंकी हमलों की योजना बनाई जा रही थी। सैन्य या नागरिक ढाँचों को टारगेट नहीं किया गया। यह कार्रवाई संयमित, सटीक और आतंकवाद-विरोधी थी।
राजनीतिक और सैन्य तनाव चरम पर
भारत और पाकिस्तान के बीच फरवरी 2021 के संघर्षविराम समझौते के बाद यह सबसे बड़ी सैन्य टकराव है। विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान द्वारा “युद्ध की चेतावनी” और आपातकाल लागू करना स्थिति को और गंभीर कर सकता है।
रिपोर्ट: लोक निर्माण टाईम्स ब्यूरो




