‘हम युद्ध में नहीं घसीटे जाएंगे, ये ट्रंप का निजी फैसला…’ अमेरिका के 48 घंटे के अल्टीमेटम से ब्रिटेन ने बनाई दूरी

ब्रिटेन ने ट्रंप के ईरान अल्टीमेटम से किनारा करते हुए साफ किया है कि वे इस युद्ध में नहीं घसीटे जाएंगे. उनका मुख्य उद्देश्य सैन्य कार्रवाई के बजाय क्षेत्र में तनाव कम करना और अपने व्यापारिक हितों की रक्षा करना है.

'हम युद्ध में नहीं घसीटे जाएंगे, ये ट्रंप का निजी फैसला...' अमेरिका के 48 घंटे के अल्टीमेटम से ब्रिटेन ने बनाई दूरीमिडिल ईस्ट में 28 फरवरी से शुरू हुआ संघर्ष अब एक खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कड़े तेवर और ईरान को दिए गए 48 घंटे के अल्टीमेटम ने दुनियाभर की नजरें इस विवाद पर टिका दी हैं. इस बीच ट्रंप अपने NATO सहयोगियों पर भी जमकर बरसे हैं. लेकिन ब्रिटेन ने इस पूरे मामले पर बेहद सधी हुई प्रतिक्रिया दी है. ब्रिटेन के कैबिनेट मंत्री स्टीव रीड ने कहा है कि यूके इस युद्ध में सीधे तौर पर शामिल होने या इसमें घसीटे जाने के पक्ष में नहीं है.

ब्रिटेन का दो टूक जवाब -‘हम युद्ध में नहीं पड़ेंगे’

ट्रंप के इस आक्रामक रुख पर ब्रिटेन ने अपना पक्ष साफ किया है. ब्रिटिश  कैबिनेट मंत्री स्टीव रीड ने स्काई न्यूज से बातचीत में साफ किया कि ब्रिटेन इस युद्ध का हिस्सा नहीं बनेगा. हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि ब्रिटेन क्षेत्र में अपने नागरिकों और आर्थिक हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह तैयार है. रीड के अनुसार, ब्रिटेन का मुख्य फोकस स्थिति को शांत करने और इस संघर्ष को जल्द से जल्द खत्म करने पर है.

ट्रंप की ईरान को खुली धमकी

ब्रिटेन का यह बयान तब आया जब ट्रंप ने  दी थी. ट्रंप ने ईरान को वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद अहम माने जाने वाले होर्मुज स्ट्रेट को खोलने के लिए सिर्फ 48 घंटे का समय दिया. ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर चेतावनी देते हुए लिखा कि अगर ईरान ने 48 घंटे के भीतर बिना किसी धमकी के इस रास्ते को पूरी तरह नहीं खोला, तो अमेरिका उनके पावर प्लांट्स को तबाह कर देगा. शुरुआत सबसे बड़े पावर प्लांट से होगी.

अपनों पर भड़के ट्रंप, NATO को बताया ‘कागज का शेर’

ईरान के खिलाफ इस सैन्य अभियान में सहयोग न मिलने से ट्रंप अपने सहयोगी देशों से भी खफा हैं. उन्होंने शुक्रवार को NATO देशों को फटकार लगाते हुए उन्हें कायर और कागज का शेर कह डाला. ट्रंप ने अपनी भड़ास निकालते हुए लिखा कि नाटो देश एक परमाणु शक्ति संपन्न ईरान को रोकने की लड़ाई में शामिल नहीं होना चाहते. उन्होंने सहयोगी देशों को चेतावनी भरे लहजे में कहा कि हम इसे याद रखेंगे.

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