
लखनऊ।उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार जहां भ्रष्टाचार पर सख्ती और आम लोगों को न्याय दिलाने की बात कर रही है, वहीं लखनऊ की सरोजनीनगर तहसील को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह तहसील भूमाफियाओं और कुछ राजस्व कर्मियों की गतिविधियों का केंद्र बनती जा रही है।सैय्यद बहादुर हुसैन की 1969 की मृत्यु रसीद और नगर निगम की 1998 की प्रमाण पत्र के बाद भी राजस्व कर्मी कर दिए 1969 की रसीद के आधार पर वरासत
आरोप है कि जिन जमीनों का वर्षों से रख-रखाव नहीं है या जिनके स्वामियों की मृत्यु के बाद विरासत (वारासत) दर्ज नहीं हुई, उन पर भूमाफियाओं की नज़र रहती है। ऐसे मामलों में लेखपाल व अन्य राजस्व कर्मियों की भूमिका भी संदिग्ध बताई जा रही है।
सेवई गांव का मामला
सरोजनीनगर तहसील के अंतर्गत, थाना सुशांत गोल्फ सिटी क्षेत्र के ग्राम सेवई में स्थित गाटा संख्या 780, 537 और 615 को लेकर विवाद सामने आया है। बताया जा रहा है कि इन गाटों के मूल भूस्वामियों की मृत्यु के बाद वारासत दर्ज नहीं हुई, जिसका कथित तौर पर गलत फायदा उठाया गया।
फ़र्ज़ी दस्तावेज़ों से नामांतरण का आरोप
स्थानीय लोगों के अनुसार, नावेद हुसैन नामक व्यक्ति, जो पहले लॉन्ड्री का काम करने वाला बताया जाता है, ने कथित तौर पर:
फ़र्ज़ी सजरा (वंशावली) तैयार कराया,
मृत्यु से संबंधित संदिग्ध काग़ज़/रसीदें प्रस्तुत कीं,
और कुछ राजस्व कर्मियों की मिलीभगत से
इन गाटों में अपना नाम राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज करा लिया।
आरोप है कि नाम चढ़ते ही उक्त जमीन के काग़ज़ किसी अन्य को बेच दिए गए।
मकान को खेती दिखाने का आरोप
मामले में सबसे चौंकाने वाला आरोप यह है कि जिस भूमि पर पहले से मकान बना हुआ था, उसे राजस्व रिकॉर्ड में कृषि भूमि (खेती) दर्शा दिया गया।
पीड़ित पक्ष का कहना है कि इसके GPS आधारित फोटो और साक्ष्य मौजूद हैं, जिनसे स्पष्ट होता है कि जमीन पर निर्मित ढांचा पहले से था।
प्रशासनिक कार्रवाई की मांग
स्थानीय नागरिकों और पीड़ित पक्ष ने मांग की है कि:
पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए,
फ़र्ज़ी दस्तावेज़ों के आधार पर हुए नामांतरण को निरस्त किया जाए,
और यदि राजस्व कर्मियों की संलिप्तता पाई जाती है तो उनके विरुद्ध कठोर विभागीय व कानूनी कार्रवाई हो।
निगाहें शासन-प्रशासन पर
यह मामला केवल एक भूमि विवाद नहीं, बल्कि राजस्व तंत्र की पारदर्शिता और जवाबदेही से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है। अब देखने वाली बात यह होगी कि योगी सरकार के भ्रष्टाचार-मुक्त अभियान के तहत इस प्रकरण में कितनी त्वरित और निष्पक्ष कार्रवाई होती है।
एसडीएम ने दिया जांच का आश्वासन, जानकर बता रहे गम्भीर मामला।



