
चीन में क्यों नहीं होते आतंकी हमले? जानिए इसके चार बड़े कारण
लोकनिर्माण टाईम्स डेस्क। जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए भीषण आतंकी हमले से भारत ही नहीं, पूरी दुनिया स्तब्ध है। इस दर्दनाक घटना के बाद एक सवाल फिर उठने लगा है कि जब पूरी दुनिया आतंकवाद से जूझ रही है, तो चीन जैसे बड़े देश में आतंकवादी घटनाएं क्यों लगभग न के बराबर होती हैं?
अगर हम हाल के वर्षों का अध्ययन करें तो साफ दिखता है कि चीन में आतंकी हमले बेहद दुर्लभ हैं। इसके पीछे कई गहरे और रणनीतिक कारण हैं। आइए जानते हैं उन प्रमुख कारणों को:
1. पाकिस्तान से गहरी दोस्ती
दुनिया के अधिकतर आतंकी संगठनों को पाकिस्तान और उसकी खुफिया एजेंसी ISI का समर्थन प्राप्त है। पाकिस्तान ने हमेशा चीन के साथ मित्रता निभाई है। रक्षा, व्यापार और कूटनीति के क्षेत्र में चीन पर पाकिस्तान की भारी निर्भरता है।
इस गहरी दोस्ती के कारण पाकिस्तान अपने समर्थित आतंकी संगठनों को चीन के खिलाफ कोई गतिविधि करने से रोकता है, ताकि उसकी सबसे बड़ी रणनीतिक साझेदारी खतरे में न पड़े। यही कारण है कि पाकिस्तान से संचालित आतंकवाद का असर चीन पर नहीं पड़ता।
2. सख्त सुरक्षा व्यवस्था और ‘जीरो टॉलरेंस नीति’
चीन की सुरक्षा व्यवस्था बेहद सख्त है। आतंकी गतिविधियों के खिलाफ चीन ने ‘जीरो टॉलरेंस पॉलिसी’ अपनाई है।
विशेष सुरक्षा बलों का गठन, व्यापक निगरानी प्रणाली, और नागरिकों पर कड़ी नजर रखने जैसी रणनीतियों से चीन आतंकवाद को जड़ से कुचलने का प्रयास करता है।
सरकार का तत्काल और कठोर एक्शन आतंकवाद को पनपने का मौका ही नहीं देता।
3. सीमाओं पर मजबूत निगरानी तंत्र

चीन ने अपनी सीमाओं को अति-सुरक्षित बना रखा है। चाहे भारत के साथ सीमाएं हों या पाकिस्तान के साथ, चीन ने हर सीमा पर अत्याधुनिक निगरानी और गश्त प्रणाली स्थापित कर रखी है।
भारत कभी आतंकवाद को समर्थन नहीं देता और पाकिस्तान चीन का सहयोगी है, इस वजह से सीमा पार से आतंकी घुसपैठ का खतरा न्यूनतम है।
4. आर्थिक विकास और बेहतर जीवन स्तर
पिछले कुछ दशकों में चीन ने अभूतपूर्व आर्थिक विकास किया है। देशभर में रोजगार के अवसर बढ़े हैं और नागरिकों का जीवन स्तर ऊंचा हुआ है।
जब रोजगार और शिक्षा के अच्छे अवसर होते हैं, तो समाज में कट्टरता और आतंकी विचारधारा के लिए जगह कम रह जाती है।
चीन की सरकार का बड़ा फोकस बेहतर शिक्षा




