
लोक निर्माण टाइम्स संवाददाता
लखनऊ।
लखनऊ जनपद के सरोजनीनगर तहसील अंतर्गत ग्राम सेवई स्थित गाटा संख्या 615, 537 एवं 780 की करोड़ों रुपये मूल्य की भूमि को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। शिकायतकर्ता विनोद कुमार गुप्ता ने आरोप लगाया है कि कूटरचित एवं परस्पर विरोधाभासी दस्तावेजों के आधार पर राजस्व अभिलेखों में नामांतरण कराकर विवादित भूमि पर कब्जा एवं विक्रय का प्रयास किया गया। उन्होंने पूरे प्रकरण की स्वतंत्र एवं उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
शिकायतकर्ता के अनुसार, उनके पक्ष में स्वर्गीय सैय्यद बहादुर हुसैन की वसीयत उपलब्ध है। साथ ही नगर निगम, लखनऊ द्वारा जारी मृत्यु प्रमाण-पत्र में सैय्यद बहादुर हुसैन की मृत्यु 25 अगस्त 1998 दर्ज है। उनका आरोप है कि इसके बावजूद वर्ष 2017 में सैय्यद बहादुर हुसैन को जीवित दर्शाकर उनके नाम से विक्रय विलेख कराया गया।
विनोद कुमार गुप्ता का कहना है कि बाद में नामांतरण कार्यवाही में 1969 की कथित कब्रिस्तान/करबला मृत्यु रसीद प्रस्तुत की गई, जिसमें सैय्यद बहादुर हुसैन की मृत्यु 23 मई 1969 दर्शाई गई। शिकायतकर्ता का कहना है कि नगर निगम के सरकारी रिकॉर्ड और कब्रिस्तान के दस्तावेज़ में दर्ज तथ्यों के बीच स्पष्ट विरोधाभास है, जिसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया है कि नावेद हुसैन द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों में भी कई असंगतियां हैं। उनके अनुसार, वर्ष 2004 में न्यायालय में दायर एक वाद में नावेद हुसैन ने अपने पिता सैय्यद हिदायत हुसैन की मृत्यु 02 अप्रैल 2001 दर्शाई थी, जबकि बाद में नगर निगम के मृत्यु प्रमाण-पत्र में मृत्यु 08 फरवरी 2001 दर्ज है।
मामले में वंशावली (सिजरा) और राजस्व अभिलेखों को लेकर भी प्रश्न उठाए गए हैं। शिकायतकर्ता के अनुसार, नामांतरण के लिए प्रस्तुत सिजरे में नासिर हुसैन के दो पुत्र सैय्यद हिदायत हुसैन एवं सैय्यद फर्चन्द हुसैन दर्शाए गए हैं। नामांतरण में संलग्न कब्रिस्तान की मृत्यु रसीद में भी “सैय्यद फर्चन्द हुसैन पुत्र नासिर हुसैन” अंकित है। जबकि उपलब्ध खतौनी में “सैय्यद फर्चन्द हुसैन पुत्र अलीबख्श” दर्ज है। शिकायतकर्ता का कहना है कि इन दस्तावेजों का आपसी मिलान कई महत्वपूर्ण प्रश्न खड़े करता है।
विनोद कुमार गुप्ता का यह भी दावा है कि 22 फरवरी 2025 के नामांतरण आदेश में फर्चन्द हुसैन पुत्र अलीबख्श तथा मीर सैय्यद हुसैन पुत्र नासिर हुसैन का उल्लेख मिलता है, लेकिन आदेश में सैय्यद हिदायत हुसैन अथवा नावेद हुसैन पुत्र सैय्यद हिदायत हुसैन को उत्तराधिकारी मानने का आधार स्पष्ट रूप से अंकित नहीं है। इसके बावजूद राजस्व अभिलेखों में नावेद हुसैन का नाम दर्ज कर दिया गया। शिकायतकर्ता ने इस प्रक्रिया की वैधता पर प्रश्न उठाते हुए इसकी जांच की मांग की है।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि बाद में इसी नामांतरण के आधार पर विवादित भूमि का विक्रय उदय नारायण पाण्डेय पुत्र द्वारिका पाण्डेय के पक्ष में कर दिया गया। उनका कहना है कि उन्हें पूरे प्रकरण पर संदेह तब हुआ जब विवादित भूमि पर कथित रूप से कब्जा करने का प्रयास किया गया। इसके बाद उन्होंने उपलब्ध दस्तावेजों का परीक्षण कराया, जिसमें कई कथित विरोधाभास सामने आए।
इस मामले में एक और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया है। पूर्व ग्राम प्रधान, ग्राम सेवई ने कथित रूप से यह बयान दिया है कि विनोद कुमार गुप्ता वर्ष 1995 से उक्त गाटा संख्याओं पर कब्जे में हैं। शिकायतकर्ता का कहना है कि यह तथ्य उनके लंबे समय से चले आ रहे कब्जे और दावे का समर्थन करता है।
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि कुछ प्रभावशाली व्यक्तियों तथा कुछ अधिकारियों की कथित मिलीभगत से उनकी संपत्ति पर अवैध कब्जा करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री, जिलाधिकारी, पुलिस प्रशासन तथा राजस्व विभाग से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच, सभी मूल अभिलेखों के सत्यापन तथा यदि किसी प्रकार की अनियमितता या कूटरचना पाई जाए तो संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
सेवई की करोड़ों की भूमि पर बड़ा विवाद: वसीयत, मृत्यु प्रमाण-पत्र, सिजरा, नामांतरण और विक्रय विलेख पर उठे सवाल; शिकायतकर्ता ने उच्चस्तरीय जांच की मांग की
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