
उत्तर प्रदेश के एक छोटे से शहर में रहने वाला सागर (बदला हुआ नाम) दिल्ली की एक बड़ी आईटी कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर था। सीधा-साधा, मेहनती और शांत स्वभाव का सागर अपनी पत्नी रागिनी से बेहद प्यार करता था। रागिनी खूबसूरत थी, लेकिन उसकी ख्वाहिशें बहुत बड़ी थीं। सागर अपनी तरफ से उसकी हर इच्छा पूरी करता था, लेकिन रागिनी के दिल में कुछ और ही चल रहा था।
रागिनी की जिंदगी में विवेक नाम का एक युवक आ चुका था, जो उसका पुराना दोस्त था। सागर जब भी ऑफिस के काम से शहर से बाहर जाता, रागिनी और विवेक के बीच नजदीकियां बढ़ने लगतीं। यह सिलसिला महीनों तक चलता रहा, लेकिन सागर इस बात से पूरी तरह अनजान था कि उसकी पीठ पीछे बेवफाई की एक गहरी साजिश रची जा रही है।
शक की पहली चिंगारी
एक दिन सागर का टूर अचानक कैंसिल हो गया और वह बिना बताए रात को घर लौट आया। घर का दरवाजा अंदर से बंद था। काफी देर खटखटाने के बाद रागिनी ने दरवाजा खोला, लेकिन उसके चेहरे पर घबराहट साफ दिख रही थी। सागर को घर में किसी और के होने का अहसास हुआ, लेकिन रागिनी ने बात को यह कहकर टाल दिया कि वह गहरी नींद में थी।
इस घटना के बाद सागर के मन में शक का बीज बोया जा चुका था। उसने रागिनी की हरकतों पर नजर रखना शुरू कर दिया। रागिनी अक्सर अपने फोन का पासवर्ड बदल देती और देर रात तक किसी से चैटिंग करती रहती थी। सागर ने एक दिन रागिनी का फोन चुपके से चेक किया, तो विवेक के साथ उसकी चैट और वॉयस नोट्स देखकर उसके पैरों तले से जमीन खिसक गई। रागिनी न सिर्फ उसे धोखा दे रही थी, बल्कि विवेक के साथ मिलकर सागर की संपत्ति अपने नाम कराने की योजना भी बना रही थी।
वो खौफनाक रात
जब सागर ने रागिनी को रंगे हाथों पकड़ा और विवेक से दूर रहने की चेतावनी दी, तो रागिनी को लगा कि उसका राज खुल चुका है और अब उसका खेल खत्म हो जाएगा। उसने विवेक के साथ मिलकर सागर को हमेशा के लिए रास्ते से हटाने का मन बना लिया।

एक शनिवार की रात, रागिनी ने बहुत ही प्यार से सागर के लिए उसका पसंदीदा खाना बनाया। सागर को लगा कि शायद रागिनी को अपनी गलती का अहसास हो गया है और वह सुधरना चाहती है। लेकिन उसे नहीं पता था कि उस खाने में विवेक द्वारा लाई गई नींद की तेज दवाइयां मिलाई गई थीं। खाना खाते ही सागर गहरी नींद में सो गया।
उस रात के सन्नाटे में, रागिनी और विवेक ने मिलकर अपनी साजिश को अंजाम दे दिया। सुबह होते ही रागिनी ने शोर मचाकर पड़ोसियों को इकट्ठा कर लिया और यह दावा किया कि सागर की अचानक तबीयत बिगड़ने से मौत हो गई।
कानून के हाथ और बेवफाई का अंत
पड़ोसी और रिश्तेदार सागर की अचानक हुई मौत से हैरान थे। सागर के छोटे भाई को इस बात पर यकीन नहीं हुआ कि उसका स्वस्थ भाई इतनी कम उम्र में दुनिया छोड़ सकता है। शक होने पर उसने पुलिस को सूचना दी।
पुलिस ने जब मामले की जांच शुरू की, तो उन्हें परिस्थितियां सामान्य नहीं लगीं। फोरेंसिक जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट से यह खुलासा हुआ कि मौत प्राकृतिक नहीं थी, बल्कि उसे जानबूझकर अंजाम दिया गया था। पुलिस ने तुरंत मामले की गहराई से तफ्तीश शुरू की और रागिनी के बयानों में विरोधाभास पाया।
जब पुलिस ने रागिनी और विवेक के मोबाइल रिकॉर्ड्स और डिजिटल साक्ष्यों को खंगाला, तो उनके बीच की पूरी साजिश बेनकाब हो गई। सबूतों के सामने रागिनी का झूठ टिक नहीं सका और उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया।




