
लखनऊ। सरोजनी नगर तहसील में चल रहे एक नामांतरण विवाद में सरकारी अभिलेखों और वादी द्वारा प्रस्तुत वंशावली (सजरा) के बीच कथित विरोधाभास को लेकर गंभीर प्रश्न उठाए गए हैं। अपीलकर्ता विनोद ने उपजिलाधिकारी न्यायालय में दायर अपील में दावा किया है कि नायब तहसीलदार द्वारा पारित आदेश उपलब्ध सरकारी अभिलेखों का समुचित परीक्षण किए बिना पारित किया गया।
अपील में कहा गया है कि मूल खतौनी में खातेदारों का विवरण स्पष्ट रूप से दर्ज है, जबकि वादी नावेद द्वारा प्रस्तुत सजरा में वंशक्रम अलग दर्शाया गया है। अपीलकर्ता का कहना है कि इन दोनों अभिलेखों का तुलनात्मक परीक्षण किए बिना उत्तराधिकार स्वीकार कर लिया गया।
अपीलकर्ता के अनुसार उसने न्यायालय में नगर निगम का मृत्यु प्रमाण-पत्र, स्वर्गीय सैय्यद बहादुर हुसैन की वसीयत, मूल खतौनी, पूर्व ग्राम प्रधान तथा अन्य गवाहों के बयान प्रस्तुत किए हैं। उसका आरोप है कि इन साक्ष्यों पर आदेश में पर्याप्त विचार नहीं किया गया।
दूसरी ओर, वादी नावेद का दावा है कि वह प्रस्तुत वंशावली के आधार पर वैधानिक उत्तराधिकारी है। इस दावे की वैधता पर अब अपीलीय न्यायालय में सुनवाई जारी है।
अब सबकी निगाहें उपजिलाधिकारी, सरोजनी नगर के निर्णय पर टिकी हैं। न्यायालय उपलब्ध अभिलेखों और दोनों पक्षों के साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद यह तय करेगा कि नामांतरण आदेश विधिसम्मत था या नहीं।
सेवई की जमीन गटा 615,537 और 780 के सरकारी खतौनी बनाम निजी सजरा: नामांतरण आदेश पर उठे गंभीर सवाल
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