
लखनऊ/सरोजनीनगर। सरोजनीनगर तहसील के अंतर्गत ग्राम सेवई की भूमि गटा संख्या 615,537 और 780 के नामांतरण प्रकरण में कई ऐसे दस्तावेज़ सामने आए हैं, जिनसे पूरे मामले पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े हो गए हैं। उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि नामांतरण की प्रक्रिया में प्रस्तुत दस्तावेज़ों, वंशावली (शजरा) और राजस्व अभिलेखों में गंभीर विरोधाभास हैं, जिनकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
शिकायत के अनुसार, नवेद हुसैन द्वारा कब्रिस्तान से संबंधित रसीदें प्रस्तुत की गई हैं, जबकि विनोद कुमार द्वारा नगर निगम, लखनऊ का मृत्यु प्रमाणपत्र तथा वर्ष 1996 का कथित वसीयतनामा प्रस्तुत किया गया है।
शिकायतकर्ता का कहना है कि उपलब्ध दस्तावेज़ों में एक ओर दफन से संबंधित पुराने अभिलेख हैं, वहीं दूसरी ओर सरकारी मृत्यु प्रमाणपत्र और कथित वसीयतनामा भी प्रस्तुत किए गए हैं। इन दस्तावेज़ों की तिथियों और तथ्यों में प्रथम दृष्टया विरोधाभास दिखाई देता है, जिसकी सत्यता की जांच आवश्यक है।
सबसे गंभीर प्रश्न यह उठाया गया है कि नामांतरण आदेश में दर्शाए गए पारिवारिक शजरे और मूल खतौनी का तुलनात्मक अध्ययन करने पर नवेद हुसैन का मूल खतौनी धारकों से वैधानिक संबंध स्पष्ट नहीं होता। शिकायतकर्ता का दावा है कि यदि शजरा, खतौनी और नामांतरण आदेश को साथ रखकर देखा जाए, तो कई महत्वपूर्ण विसंगतियाँ सामने आती हैं।
शिकायतकर्ता द्वारा उठाए गए प्रमुख प्रश्न
क्या नामांतरण से पहले प्रस्तुत दस्तावेज़ों का विधिवत सत्यापन किया गया?
क्या पारिवारिक शजरा और मूल खतौनी का मिलान किया गया?
यदि दस्तावेज़ों में विरोधाभास थे, तो नामांतरण आदेश किन आधारों पर पारित किया गया?
यदि कोई दस्तावेज़ असत्य या कूटरचित पाया जाता है, तो उसके लिए जिम्मेदार कौन होगा?
शिकायतकर्ता ने पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराने, सभी दस्तावेज़ों की फॉरेंसिक एवं अभिलेखीय जांच कराने तथा यदि किसी स्तर पर कूटरचना, धोखाधड़ी या अधिकारियों की लापरवाही अथवा मिलीभगत पाई जाती है तो संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध विधिसम्मत कार्रवाई की मांग की है।
सेवई लखनऊ मे नामांतरण आदेश पर उठे गंभीर सवाल: विरोधाभासी दस्तावेज़ों से बढ़ा विवाद, उच्चस्तरीय जांच की मांग
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